Ath Katha Yatrayam
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TypePrint
- CategoryNon-Academic
- Sub CategoryNon Fiction
- StreamStories
ब्रह्मांड के मूल में पंचतत्वों याने अग्नि, पवन, धरा, जल और आकाश का समावेश है जिसमें भारतीय दर्शन के तीन प्राकृतिक मूलभूत गुणों सत्व (Causal Body), रज (Subtle Body) और तम (Gross Body) के गुणों से अलौकिक जीवन की रचना संभव हो पाई है. समाज की रचना को सत्यम शिवम सुन्दरम के स्तर तक ले जाने में मानवीय कथाओं का -अनमोल स्थान है. जीवन से कथाओं से आलोकित है तथा कथाओं के बिना हमारा कलाकार रूप में नाटक अधूरा ही है. हम कथा सृजक हैं, कथाकार हैं और साथ ही कलाकार होकर दर्शक व श्रोता भी हैं. इस मानवीय जन्म के अनुभवों को कुछ कथा-किस्से इन पृष्ठों में लिखने का रोमांच ग्रामीण-शहरी स्तर की मानवीय संवेदना की समग्र प्रस्तुति का प्रयास है. जीवन के समर में जूझते कलाकार या कहें कथाकार हमारे साथ समुद्र-मणि की भाँति बिखरे पड़े हैं जो किस्सागोई के स्रोत बन जाते हैं. घटनाएँ, कथा-व्यथा या गाथा बनेंगी ये तो सब समय के गर्भ में है परन्तु जो जड़ व चेतना से परे अलौकिक सत्ता की प्राप्ति का मार्ग बने तो यह जीवन सफल हो. इन कथाओं का मनस्वी निचोड़ भी यही है. संस्कारों की धरा भारत आदर्श पुरुष से लेकर लाटरी की ओर दौड़ते मानव का द्रष्टिकोण प्रस्तुत करता है.
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